Wednesday, September 26, 2012
अपने स्वरूप का पता नहीं है, इसीलिए जीव बिचारा विषय विकारों में
भटक-भटककर अपना जीवन गँवा देता है। समझदार लोग समझते हैं कि शरीर की
नश्वरता क्या है। आग लगने पर कुआँ खोदना पड़े, उसके पहले ही कुआँ खोदकर
तैयार कर देते हैं।
बुढ़ापा आने से पूर्व ही शरीर को विषय-विकारों में न गिराकर परमात्मा के
ज्ञान में लगा देते हैं। सारी रात दूसरों की नींद खराब हो और लोग बोलने
लगें कि बुढ्ढा जल्दी मर जाये तो अच्छा, उसके पहले वह अपने अहंकार को मार
देता है, वासना को मार देता है।
चेहरे पर झुर्रियाँ पड़ जायें और चेहरा भद्दा हो जाये उसके पहले वह अपना
असली चेहरा देख लेता है। बाल सफेद होने से पूर्व वह अपना हृदय स्वच्छ कर
लेता है। आँखें कमजोर हो जायें, कान बहरे हो जायें और मित्र-संबंधी सब
पराये होने लग जायें, इसके पूर्व वह परमात्मा का हो जाने की कोशिश करता
है।…….पूज्यपाद श्रीबापूजी
ज्ञान में लगा देते हैं। सारी रात दूसरों की नींद खराब हो और लोग बोलने
लगें कि बुढ्ढा जल्दी मर जाये तो अच्छा, उसके पहले वह अपने अहंकार को मार
देता है, वासना को मार देता है।
चेहरे पर झुर्रियाँ पड़ जायें और चेहरा भद्दा हो जाये उसके पहले वह अपना
असली चेहरा देख लेता है। बाल सफेद होने से पूर्व वह अपना हृदय स्वच्छ कर
लेता है। आँखें कमजोर हो जायें, कान बहरे हो जायें और मित्र-संबंधी सब
पराये होने लग जायें, इसके पूर्व वह परमात्मा का हो जाने की कोशिश करता
है।…….पूज्यपाद श्रीबापूजी
उठ जाओ और वैराग्य का आश्रय लो। जैसे साईकल के पहिए निकाल दो तो साईकल
चलना मुश्किल है ऐसे ही जीवन से अभ्यास और वैराग्य हटा दो तो प्रभु की
यात्रा होना मुश्किल है।
अतः तुम ध्यान का अभ्यास करो और विवेक के साथ अपने भीतर छुपे हुए वैराग्य
को जगाकर वैराग्य में ही राग रखो। वैराग्यरागरसिको भवः। संसार के राग से
बचकर प्रभु परायण हो जाओ।
भगवन कहते हैं: जैसे कोई व्यक्ति आँखों में शूल नहीं भोंकना चाहता ऐसे ही
समझदार व्यक्ति अपने आप को विषयों के शूल नहीं भोंकना चाहता। जैसे कोई भी
समझदार मनुष्य अपने भोजन में विष नहीं डालना चाहता, ऐसे ही हे उद्धव !
जिज्ञासु व्यक्ति अपने जीवन में विषयों का विष नहीं डालना
चाहता।…….पूज्यपाद श्रीबापूजी
बचकर प्रभु परायण हो जाओ।
भगवन कहते हैं: जैसे कोई व्यक्ति आँखों में शूल नहीं भोंकना चाहता ऐसे ही
समझदार व्यक्ति अपने आप को विषयों के शूल नहीं भोंकना चाहता। जैसे कोई भी
समझदार मनुष्य अपने भोजन में विष नहीं डालना चाहता, ऐसे ही हे उद्धव !
जिज्ञासु व्यक्ति अपने जीवन में विषयों का विष नहीं डालना
चाहता।…….पूज्यपाद श्रीबापूजी
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