अपने स्वरूप का पता नहीं है, इसीलिए जीव बिचारा विषय विकारों में
भटक-भटककर अपना जीवन गँवा देता है। समझदार लोग समझते हैं कि शरीर की
नश्वरता क्या है। आग लगने पर कुआँ खोदना पड़े, उसके पहले ही कुआँ खोदकर
तैयार कर देते हैं।
बुढ़ापा आने से पूर्व ही शरीर को विषय-विकारों में न गिराकर परमात्मा के
ज्ञान में लगा देते हैं। सारी रात दूसरों की नींद खराब हो और लोग बोलने
लगें कि बुढ्ढा जल्दी मर जाये तो अच्छा, उसके पहले वह अपने अहंकार को मार
देता है, वासना को मार देता है।
चेहरे पर झुर्रियाँ पड़ जायें और चेहरा भद्दा हो जाये उसके पहले वह अपना
असली चेहरा देख लेता है। बाल सफेद होने से पूर्व वह अपना हृदय स्वच्छ कर
लेता है। आँखें कमजोर हो जायें, कान बहरे हो जायें और मित्र-संबंधी सब
पराये होने लग जायें, इसके पूर्व वह परमात्मा का हो जाने की कोशिश करता
है।…….पूज्यपाद श्रीबापूजी
ज्ञान में लगा देते हैं। सारी रात दूसरों की नींद खराब हो और लोग बोलने
लगें कि बुढ्ढा जल्दी मर जाये तो अच्छा, उसके पहले वह अपने अहंकार को मार
देता है, वासना को मार देता है।
चेहरे पर झुर्रियाँ पड़ जायें और चेहरा भद्दा हो जाये उसके पहले वह अपना
असली चेहरा देख लेता है। बाल सफेद होने से पूर्व वह अपना हृदय स्वच्छ कर
लेता है। आँखें कमजोर हो जायें, कान बहरे हो जायें और मित्र-संबंधी सब
पराये होने लग जायें, इसके पूर्व वह परमात्मा का हो जाने की कोशिश करता
है।…….पूज्यपाद श्रीबापूजी

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