Monday, June 28, 2010

वेदान्त का यह सिद्धांत है कि हम बद्ध नहीं हैं बल्कि नित्य मुक्त हैं इतना ही नहीं, ‘बद्ध हैं’ यह सोचना भी अनिष्टकारी है, भ्रम है ज्यों हीआपने सोचा कि ‘मैं बद्ध हूँ…, दुर्बल हूँ…, असहाय हूँ…’ त्यों ही अपनादुर्भाग्य शुरू हुआ समझो आपने अपने पैरों में एक जंजीर और बाँध दी अतःसदा मुक्त होने का विचार करो और मुक्ति का अनुभव करो

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