Tuesday, October 2, 2012

अलख की ओर
गतांक से आगे.....
'अप्सरा' का अर्थ क्या है? 'अप' माने पानी और 'सरा' माने सरकनेवाला। जैसे पानी नीचे की ओर बहता है ऐसे जीवन सुख-दुःख में नीचे की ओर बहता है। सदगुरुओं का ज्ञान तुम्हें ऊपर उठाता है। परिस्थितियाँ हैं सरिता का प्रवाह जो तुम्हें नीचे की ओर घसीटती हैं, सदगुरु हैं 'पम्पिंग स्टेशन' जो तुम्हें हरदम ऊपर उठाते रहते हैं।

हम सुख-दुःखों से परास्त क्यों हो जाते हैं? स्वतंत्र ढंग से जीने
की कला हमारे पास नहीं है। ऐसा नहीं है कि हमारे पास अन्न-वस्त्र नहीं है, रूपये-पैसे नहीं हैं, मकान नहीं है इसलिए दुःखी हैं। जिन महापुरुषों को खाने को रोटी नहीं, पहनने को कपड़े नहीं, रहने को घर नहीं वे भी सुखी रह सके। देखो जड़भरतजी का जीवन ! देखो शुकदेवी का जीवन ! आत्मानंद में मस्त ! अब भी, इस समय भी ऐसे महात्मा... ऐसे परम सुख के सम्राट हैं इस वसुन्धरा पर। उनके पास सुख-दुःख का उपयोग करने की, सुख-दुःख के प्रसंगो को नचाने की कला है, समझ है। चीज-वस्तुओं का बाहुल्य होते हुए भी यह समझ अगर हमारे पास नहीं है तो हम सुख-दुःख की परिस्थितियों में उलझ जाते हैं। अगर हमारे पास बढ़िया समझ है तोः

हमें हिला सके ये जमाने में दम नहीं।
हमसे जमाना है जमाने से हम नहीं।।

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