Monday, April 12, 2010

हे अज्ञानी मनुष्य ! तू क्या क्या चाहता है ? हे नादान मनुष्य ! तूने क्या क्या किया है ? ईश्वर के सिवाय तूने कितने नाटक किये ? ईश्वर को छोड़कर तूने बहुत कुछ पकड़ा, मगर आज तक मृत्यु के एक झटके से सब कुछ हर बार छूटता आया है । हजारों बार तुझसे छुड़वाया गया है और इस जन्म में भी छुड़वाया जायेगा । तू जरा सावधान हो जा .......

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