Sunday, May 2, 2010

इस बेरंग ज़िंदगी की तस्वीर तुम हो सच्चे सदगुरु मेरे ज़मीर तुम हो कबूल लो यह इनायत् मेरी मेरी ज़िंदगी का आसरा तुम हो***

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