Sunday, May 2, 2010

निष्काम कर्म करो लेकिन कर्म निष्प्रयोजन तो नहीं होना चाहिए। रागरहित होने के लिए स्वार्थरहित और सप्रयोजन, सार्थक कर्म होना चाहिए। तभी वह परहित का कार्य निष्काम सेवा बन सकेगा। रागरहित होते ही जो होना चाहिए वह होने लगेगा। जो नहीं होना चाहिए वह नहीं होगा। तो फल क्या होगा ? तुम्हारे चित्त में बड़ी शान्ति रहेगी सूर्य के होने से जो होना चाहिए वह अपने आप होने लगता है, सूर्य को कुछ करना नहीं पड़ता

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