Friday, May 14, 2010

हम भगवान् के हो जाते हैं तो भगवान् की सृष्टिके साथ उत्तम-से-उत्तम बर्ताव करना हमारे लिये आवश्यक हो जाता है । यह सब सृष्टि प्रभुकी है, ये सभी हमारे मालिकके हैं—ऐसा भाव रखोगे तो उनके साथ हमारा बर्ताव बड़ा अच्छा होगा । त्यागका, उनके हितका, सेवाका बर्ताव होगा । इससे व्यवहार तो शुद्ध होगा ही, हमारा परमार्थ भी सिद्ध हो जायगा, हम संसारसे मुक्त हो जायँगे । अतः हम भगवान् के होकर भगवान् का काम करें । ये सब प्राणी भगवान् के हैं, इन सबकी सेवा करें । अपना यह भाव बना लें—

1 comment:

  1. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
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