Monday, May 17, 2010

माँका ॠण सबसे बड़ा होता है।परन्तु पुत्र भगवान्‌ का भक्त हो जाय तो माँका ऋण नहीं रहता और माँ का कल्याण भी हो जाता है! इसलिये बहनों!माताओ! अपने बालकोंको भगवान्‌ में लगाओ,उनको भक्त बनाओ!आपकी गोदीमें भक्त आये,भगवान्‌ का भजन करनेवाला आये ऐसा बेटा हो।ऐसा बालक होना बिलकुल आपके हाथकी बात है।बालक का पहला गुरु माँ है।माँ का स्वभाव पुत्रपर ज्यादा आता है।

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