Tuesday, April 3, 2012

बापूजी, मैं आपसे प्रार्थना करना चाहती हूँ ,आपसे बातें करना चाहती हूँ ,पर जब साधन -भजन के लिए बैठती हूँ तो मन शांत हो जाता है . न प्रार्थना कर पाती हूँ ,न बातें कर पाती हूँ . न हीं मेरे मन में कोई भाव उठता है . गुरुदेव मै क्या करू ?

**तुम करने के झंझट से पार हो जाओ । जो प्रभु तेरी मर्ज़ी । बातें करके भी क्या करोगी ? तो बातें कर -कराके अगर अच्छी बातें होंगी तो मैं बोलूँगा ,भगवान में शांत हो जाओ । संकल्प रहित हो जाओ । वो तो आ गई तो , फिर बातें करने की झंझट को क्यों बुलाती हो ? तुम मेरे से बैठ कर मानसिक बातें करोगी तो मैं इतना खुश नहीं होऊंगा जितना तुम भगवान में शांत हो जाओगी तो मैं खुश होऊंगा । शराबी दूसरे को शराबी देख कर खुश हो जाता है । ऐसे ही तुम भगवान में स्थित होने लगोगी तो मुझे अधिक प्रसन्नता होगी ।
न मुझसे बाहर से मिलने की कोशिश करो ना मेरे से बातें करने की कोशिश करो । जो हो रहा है उसी में आगे बढ़ो , "ईश्वर की ओर" पुस्तक पढ़ते -पढ़ते "नारायण स्तुति " पुस्तक पढ़ते -पढ़ते भगवान के स्वभाव में डूबते जाओ ।

No comments:

Post a Comment