Wednesday, March 21, 2012

कोई रात पूनम तो कोई है अमावस, चांदनी उसकी जो चाँद पाना सीख ले |

यूँ तो सभी आये हैं रोते हुए इस जहाँ में, पर सारा जहान उसका जो मुस्कुराना सीख ले |

कुछ भी नज़र न आये अंधेरों में रह कर, रौशनी है उसकी जो शमा जलना सीख ले |

हर गली में मंदिर हर राह में मस्जिद है, पर खुदा है उसका जो सर झुकाना सीख ले |

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