संसार तेरा घर नहीं, दो चार दिन रहना यहाँ ।
कर याद अपने राज्य की, स्वराज्य निष्कंटक जहाँ ॥
मरो मरो सब कोई कहे मरना न जाने कोय ।
एक बार ऐसा मरो कि फिर मरना न होय ॥
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