तुझ में ओम...मुझ में ओम...सब में ओम समाया....
सब से कर लो प्यार जगत में... कोई नही पराया...2
एक बाग के पुष्प है सारे...एक माला के मोती...
एक दिए के बाती है सब... एक हम सब की ज्योति...
ना जाने किस कारीगर ने एक माटी का बनाया...
सब से कर लो प्यार जगत में... कोई नही पराया...2
एक बाप के बेटें है सब... एक हमारी माता...
दाना पानी देने वाला...एक हमारा दाता...
ना जाने किस मूरख ने लड़ना हमे सिखाया...
सब से कर लो प्यार जगत में... कोई नही पराया...2
ऊंच -नीच और जाति -पाति की... दीवारों को तोडों...
बदला ज़माना तुम भी बदलो,बुरी आद्तें छोड़ों,प्रभु से नाता जोड़ों
जागो और जगाओ सब को...समय है ऐसा आया...
सब से कर लो प्यार जगत में... कोई नही पराया...2
तुझ में ओम...मुझ में ओम...सब में ओम समाया....
सब से कर लो प्यार जगत में... कोई नही पराया...
Thursday, March 29, 2012
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