चार दिन की जिंदगानी में , तन से ,
मन से हमेशा के लिए रहता नहीं इस डरे फानी में |
कुछ अच्छा काम कर लो , चार दिन की जिंदगानी में ||
तन से सेवा करो जगत की , मन से प्रभु के हो जाओ |
शुद्ध बुद्धि से तत्वनिष्ट्ठ हो , मुक्त अवस्था को तुम पाओ ||
Wednesday, March 21, 2012
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